Coal_India_Dhanbad

हिंदी में पढें| Jharkhandinfo New : Coal India Announced: Dearness Allowance decreased by 0.9%

ड्यूटी कोल इंडिया ने जारी किया फरमान|Coal India Announced: Dearness Allowance decreased by 0.9%

महंगाई भत्ता 0.9 प्रतिशत हुआ कम

धनबाद : कोल इंडिया प्रबंधन ने कोलकर्मियों को मिलने वाले वाले संडे को बंद करने का फरमान जारी कर दिया है. कोल इंडिया के महाप्रबंधक (कार्मिक एवं औद्योगिक संबध) ए0 के0 सक्सेना द्वारा जारी फरमान कोल इंडिया की सभी अनुषंगी इकाइयों के मुख्यालयों में पहुंच गया है। इस फरमान को अनुपालन कराने के लिए बीसीसीएल मुख्यालय में रणनीति बनायी जा रही है। श्री सक्सेना द्वारा जारी पत्र में कोल इंडिया बोर्ड की बैठक में लिये गये निर्णय का हवाला देते हुए अनुषंगी इकाइयों से एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी गयी है। कोल इंडिया के इस फरमान से कोल कर्मियों में हड़कंप है। वहीं दूसरी ओर, कोल इंडिया एवं जेबीसीसीआइ के वरीय प्रबंधक कार्मिक मनोज कुमार ने कार्यालय सूचना जारी की है।

Coal_India_Dhanbad

Coal_India_Dhanbad

उसके अनुसार कोल इंडिया के कामगारों का महंगाई भत्ता 49.7 फीसदी से घटा कर 48.8 कर दिया गया है। कोल इंडिया प्रबंधन के उपरोक्त दोनों निर्णयों से बीसीसीएल के करीब 49 हजार कोल कर्मियों समेत कोल इंडिया के 2.98 लाख कोलकर्मी प्रभावित होंगे, यानी कोल इंडिया ने होली में कोयला मजदूरों का रंग बदरंग कर दिया है।

यह है कारण

कोल इंडिया बोर्ड की 17 जनवरी 2017 को हुई 335 वीं बैठक की कार्यवाही के मुताबिक कोल इंडिया प्रबंधन का मानना है कि कोयला के उत्पादन खर्च में कर्मियों का खर्च 50 प्रतिशत है। इस खर्च को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है। जानकार इस पर कुछ अलग विचार  रखते हैं। वे कहते हैं कि 10वें वेतन समझौता  की वार्ता चल रही है. प्रबंधन ने पहले तीन हजार करोड़ और फिर बाद में 2200 करोड़ का ऑफर दिया। उसे यूनियनों ने खारिज कर दिया। नये वेज पर कंपनी को भारी वित्तीय खर्च वहन करना पड़ेगा। इसलिए प्रबंधन ने मजदूरों को मिलने वाली कुछ सुविधाओं में कटौती कर वेज रिवीजन से पड़ने वाले आर्थिक भार से निबटने के लिए यह कवायद शुरू की है।

महंगाई भत्ता का प्रभाव

कोलकर्मियों का महंगाई भत्ता 0.9 प्रतिशत कम होने से तत्कालीक और दूरगामी प्रभाव होंगे, तत्काल में मजदूरों का अगले माह में कम वेतन मिलेगा। जानकार के मुताबिक सबसे नये मजदूर जिसका बेसिक एक हजार है, उसे लगभग 162 से 170 रुपया तक कम मिलेगा। इसका प्रभाव पेंशन, पीएफ और ग्रेच्युटी पर भी पड़ेगा।

संडे बंदी का प्रभाव

वर्तमान में कोयला कामगारों को रविवार को ड्यूटी करने के एवज में एक अतिरिक्त हाजिरी और सप्ताह में किसी एक रेस्ट मिलता है। कई मजदूरों को यह रोटेशन के आधार पर मिलता है। अब नये आदेश के बाद रविवार को सामान्य हाजिरी मिलेगी और सप्ताह में एक दिन का रेस्ट मिलेगा। जानकारों के मुताबिक इस आदेश से मजदूरों को वित्तीय हानि होगी। जानकार के मुताबिक नये मजदूर जो हाल में ही ज्वाइन किया है, को एक संडे के बदले एक हजार प्रति सप्ताह और महीने में लगभग चार हजार रुपये की हानि होगी। वैसे ही जो जितना सीनियर होगा, उसको उतनी ही बड़ी वित्तीय हानि होगी।

दस वर्ष की अवधि के लिए होगा वेतन समझौता

कोयला मजदूरों का वेतन समझौता दस साल अवधि करने की तैयारी में प्रबंधन जुट गया है। जस्टिस सतीश चंद्र कमेटी की रिपोर्ट के आधार बना कर वेतन समझौता की अवधि पांच वर्ष से बढ़ाई जा रही है। इसके लिए प्रबंधन ने यूनियन प्रतिनिधियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

कोयलाकर्मियों का दसवां वेतन समझौता जुलाई 2016 से लंबित पड़ा हुआ है। यूनियन प्रतिनिधि इसे जल्द लागू करने प्रबंधन पर दबाव बनाए हुए हैं। वहीं प्रबंधन ने भी लागत न बढ़े, इसलिए कोयला मजदूरों के वेतन में न्यूनतम वेतनवृद्धि करने का प्रयास कर रहा है। दसवें वेतन समझौता में मजदूर संगठन ज्यादा तोल मोल नहीं कर सके,  इसलिए कोयला प्रबंधन ने मजदूर संगठन के साथ कोलकर्मियों पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि कोल इंडिया ने ओवरटाइम एवं संडे बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी प्रकार पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) के अधिकारियों के लिए गठित जस्टिस सतीश चंद्र कमेटी की दो अनुशंसा को आधार बनाते हुए कोल इंडिया ने कोयलाकर्मियों के दसवें वेतन समझौता में पेंच फंसा दिया है। इस संबंध में प्रबंधन का तर्क है कि जस्टिस सतीश चंद्र कमेटी ने कर्मियों का भी वेतन समझौता 10 साल करने का सिफारिश किया है और इसी को आधार बनाते हुए प्रबंधन मजदूर संगठनों पर भरपूर दबाव बना रही है। प्रबंधन की इस नीति से कर्मियों एवं यूनियन प्रतिनिधियो में हड़कंप मच गया है। चूंकि वेतन समझौता की वार्ता जारी है, इसलिए यूनियन प्रतिनिधि दवाब बना कर विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं।

आमदनी बढ़ी और मैनपावर हुआ कम

यहां यह बताना लाजिमी होगा कि पिछले 9वें वेतन समझौता के समय कोल इंडिया की आमदनी 62 हजार करोड़ रुपए थी,  जो अब बढ़ कर एक लाख आठ हजार करोड़ रुपए के आसपास हो गई है। इसी प्रकार 9वें वेतन समझौता के वक्त कोल इंडिया का उत्पादन 431 मिलियन टन था,  जो अब बढ़कर 538 मिलियन टन हो गया है। इसी तरह मैनपावर 3.68 लाख थी, जो अब घट कर 3.15 लाख हो गई है। श्री मिश्रा ने कहा कि पांच सालों में कोल इंडिया का लाभ बढ़ा है,  वहीं मैनपावर घटा है।

एटक के वरिष्ठ नेता दीपेश मिश्रा का कहना है कि सीआईएल की आमदनी में इजाफा हो रहा है, इसलिए वेतन समझौता में पिछले बार से कम वृद्धि कतई मंजूर नहीं है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए जो योजना बनाई है, उसमें कोल इंडिया का उत्पादन लक्ष्य एक हजार मिलियन टन रखा है। इससे साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में कोल इंडिया की आमदनी और तेजी से बढ़ेगी। इसका सीधा मतलब कमाई ज्यादा तो वेतन वृद्धि भी अधिक देना होगा। वेज बोर्ड 10  पर सिर्फ कोयला मजदूर ही नहीं बल्कि मजदूर संघ ने भी पैनी नजर रखी है। अगर सब कुछ ठीक नहीं रहा तो मजदूर संगठन पूरी ताकत के साथ आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।

सौजन्य : New Today…1(Whatsapp News Group)

Share This:

Leave a Reply